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नोटबंदी की मार के बाद जीएसटी लागू होने से एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों के अनुपालन लागत और अन्य लागतों काफी इजाफा हो गया है, जिससे इस सेक्टर के उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जीएसटी के बाद एमएसएमई सेक्टर के अधिकतर उद्योग टैक्स के दायरे में भी आ गए हैं।

देश में लगभग 2 साल पहले नोटबंदी और उसके एक साल बाद लागू जीएसटी ने देश के मध्यम और लघु उद्योगों की कमर तोड़ दी है। नोटबंदी लागू होने के 2 साल बाद भी देश का सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) सेक्टर अब तक इसके असर से पूरी तरह से ऊबर नहीं पाया है। नोटबंदी के बाद जीएसटी ने तो इस सेक्टर की हालत और खराब कर दी है।

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आपको बता दें कांग्रेस और राहुल गांधी शुरु से नोटबन्दी और जीएसटी की विरोधी रहें है हर मोर्चे पर इसका विरोध किया, और कहा था यह फैसला गरीबों का कमर तोड़ कर रख देगा जो आज साबित हो चुका है।आरबीआई की एक स्टडी के अनुसार, बीते दिनों देश में एमएसएमई सेक्टर को लगे नोटबंदी और जीएसटी के दो बड़े झटकों की वजह से वस्त्र उद्योग और रत्न और आभूषण सेक्टर जैसे उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन सेक्टर में काम करने वालों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। नोटबंदी के बाद जीएसटी के आने से एमएसएमई वर्ग के उद्योगों में लागत काफी बढ़ गई है।

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